राजस्थान सरकार

राजस्थान सरकार ने मानी फोन टैपिंग की बात, इस्तीफा देंगे अशोक गहलोत?

पिछले साल एक ऑडियो क्लिप वायरल हुई. कथित तौर पर यह आवाज केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और राजस्थान के कांग्रेस विधायक की थी. इसके बाद, अशोक गहलोत की सरकार पर फोन टैपिंग के आरोप लगे. राजस्थान में सियासी भूचाल आया. विधायक रिजॉर्ट में थामे गए. लगा कि सचिन पायलट भी अपने दोस्त ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरह पलटी मारेंगे. पायलट के बीजेपी में जाने की संभावना जोरों पर थी. हालांकि, आखिर में गहलोत की सरकार बच गई और सचिन पायलट कांग्रेस में ही बने रहे.

अशोक गहलोत ने कहा था- छोड़ दूंगा राजनीति

इस सबसे में जो सबसे गंभीर विषय था, वह था फोन टैपिंग. राजस्थान की तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार ने इससे इनकार किया. खुद अशोक गहलोत ने कहा था, ‘हमारी सरकारी इस तरह से काम नहीं करती है.’ उन्होंने यह भी कहा कि अगर ऐसे आरोप साबित होते हैं, तो वह राजनीति और सत्ता दोनों छोड़ देंगे.

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लिखित जवाब में मानी फोन टैपिंग की बात

अब राजस्थान की विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में राज्य की सरकार ने फोन टैपिंग की बात स्वीकारी है. इस अलोकतांत्रिक काम को सुरक्षा व्यवस्था और तमाम कानूनी पचड़ों से ढकने की कोशिश की गई है. कहा गया है कि सक्षम अधिकारी की सहमति के बाद फोन टैपिंग की गई. हालांकि, राजस्थान पुलिस ही ऐसी किसी भी फोन टैपिंग से इनकार कर रही है. राजस्थान सरकार ने अपने जवाब में इंडियन टेलिग्राफ ऐक्ट, 1885 और इंडियन टेलिग्राफ (संशोधित) नियम, 2007 और इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलजी ऐक्ट, 2000 का हवाला दिया है. हालांकि, सरकार ने यह नहीं बताया है कि किन फोन नंबरों को टैप किया गया.

सामान्य होता जा रहा है तंत्र का दुरुपयोग

कुल मिलाकर फोन टैपिंग की बात, जो कि गंभीर मसला है. उसे पहले राजस्थान सरकार ने सिरे से खारिज किया, अब खुद ही लिखित तौर पर स्वीकार किया है. यहां गंभीर सवाल यह उठता है कि क्या राजस्थान सरकार ने शक्तियों का दुरुपयोग नहीं किया है? या हमारे देश के राजनीतिक सिस्टम में यह सब कुछ सामान्य हो गया है. फोन टैपिंग, छापेमारी और मुकदमेबाजी ही सरकारों की शक्ति हो गए हैं.

सरकारें इन एजेंसियों और तंत्र का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हित के लिए करती हैं और इसे किसी न किसी कानून से ढकने की कोशिश करती हैं. इसे रोकने वाला कोई नहीं है. दूसरी तरफ, वही पार्टी जो विपक्ष में होते हुए इसे गलत ठहराती है, सत्ता में आते ही वह इन तंत्रों का इस्तेमाल अपने हित के लिए करने लगती है और सबकुछ सामान्य दिखाया जाता है.

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