विराट अकड़ से नष्ट होता क्रिकेट का शास्त्रीय और जेंटलमैन स्वरूप!


नंबर एक टेस्ट टीम का सेहरा सजाए भारतीय टीम उछाल और सीम के लिए प्रसिद्ध दक्षिण अफ्रीकी पिचों पर खेलने उतरी थीं। पिछले एक बरस के निरंतर मैच जिताऊ प्रदर्शन के आधार पर टीम इंडिया से ये अपेक्षा थी कि ये मेज़बान को उनके घर मे जबरदस्त टक्कर देगी और विदेशी पिचों पे मिलने वाले नाकामयाबी के दाग को धुलेगी भी।

पहले मैच में ही कोहली जिस एकादश के साथ उतरे, उसमें शामिल एक खिलाड़ी को लेकर क्रिकेट विश्लेषकों से लेकर सभी दर्शक हक्का-बक्का रह गए। इस एकादश में 50 से अधिक औसत के साथ 6 शतक और 9 अर्द्धशतक जड़ने वाले अजिंक्य रहाणे की जगह 25 के मामूली औसत के साथ रन बनाने वाले रोहित शर्मा को शामिल किया गया था।

हालांकि कोहली का ये प्रयोग एकदम शेखचिल्ली जैसा साबित हुआ और टीम इंडिया ने जीत के सुनहरे अवसर को गंवा दिया। 208 रन के स्कोर को भी टीम अपनी चौथी पारी में नही पा सकी। पाटा पिचों के सरताज़ रोहित शर्मा तेज, उछाल लेती, लहराती गेंदों के तिलिस्म को नही समझ पाते हैं,  वहीं अजिंक्य रहाणे ऐसी परिस्थितियों को खूब भुनाते है। अपने पिछले दक्षिण अफ्रीकी दौरे में कोहली और पुजारा के अलावा रहाणे ने ही 200 से अधिक रन बनाए थे।

अब जब पहला मैच हार गए तो सभी को अंदाजा था कि कोहली अगले मैच में अजिंक्य रहाणे को मौका देंगे मगर कोहली ने यहां भी सबको चौंका दिया और इस बार तो चौंकाया नही माथे पे बल ही पड़वा दिए। इस मैच में भी न सिर्फ रोहित शर्मा को खिलाया बल्कि पहले मैच के स्टार गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की जगह इशांत शर्मा को अंतिम एकादश में शामिल कर लिया।

दूसरा टेस्ट भी टीम इंडिया हार गई। इस बाबत जब कोहली से पत्रकारों ने सवाल पूंछा कि कप्तान साहब! आपने रहाणे को क्यों बाहर बिठा दिया? सवाल से भन्नाए कोहली बोले कि जो लोग पहले मैच में रहाणे को बाहर बैठाने की वकालत कर रहे थे, वही अब उनके न खिलाने पर जवाबतलबी कर रहे है। यही नहीं कोहली ने तो पत्रकार को ही ‘खेलने वाली एकादश’ को सुझाने का कह दिया।

कोहली के अड़ियल रवैये का अंदाजा आप लीजेंडरी क्रिकेटर सुनील गावस्कर की इस टिप्पणी से भी लगा सकते है कि भारतीय क्रिकेट से जुड़े सभी लोगों को ये दुआ करनी करनी चाहिए कि ये (कप्तान और कोच) जो कर रहे हैं वो बस सफल हो जाएं। कोहली के इस फैसले से गांगुली भी नाइत्तेफाक रखते है कि खिलाड़ी की हालिया फार्म को ध्यान में रखते हुए उसे तरजीह दी जाएं, जैसा की कोहली, रोहित को खिलाने के अपने फैसले के बचाव में कहते है। जबकि हालिया प्रदर्शन के आधार पर उन्हें भुवनेश्वर कुमार को अंतिम एकादश में शांमिल करना चाहिए था, जबकि उन्होंने इशांत को चुना। इस आधार पर कोहली अपने ‘हालिया प्रदर्शन के फार्मूले’ का भी स्वयं खंडन करते हैं।

कुल जमा देखो तो कोहली ने अपने व्यक्तित्व को कुछ ऐसा कर लिया है कि न खाता, न बही…… जो कोहली कहे वही सही। अब देखते है कि कोहली का ये रवैय्या भारतीय क्रिकेट को किस करवट बिठाता है?


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