‘भगवान जिस दीवार की आड़ में खड़ा होता है उसे राहुल द्रविड़ कहते हैं’


जब राहुल द्रविड़ क्रिकेट से रिटायर हुए तो कुछ लाइनें उनके बारे में खूब कही गईं, वो यह कि सचिन को क्रिकेट का भगवान कहा जाता है. गांगुली को ऑफ साइड का भगवान कहा जाता है. लक्ष्मण को चौथी पारी का भगवान कहा जाता है. लेकिन जब मंदिर के सारे दरवाजे बंद हो जाते हैं तो भगवान भी दीवार के पीछे खड़ा मिलता है. और उसी दीवार को राहुल द्रविड़ कहा जाता है.

साल 1996, इंग्लैंड का लॉर्ड्स मैदान. एक दाएं हाथ का बल्लेबाज और एक बाएं हाथ का बल्लेबाज, दोनों टेस्ट में अपना अन्तराष्ट्रीय पदार्पण कर रहे थे. एक ने उस मैच में शतक मारा और दूसरा चार रन से चूक गया. आगे चलकर ये दोनों भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान बने. एक का नाम था सौरव गांगुली और दूसरे का नाम राहुल द्रविड़.

अपने शानदार क्रिकेट कॅरियर में राहुल द्रविड़ ने जिस समर्पण के साथ, तेंदुलकर, गांगुली और लक्ष्मण के साथ मिलकर टीम की बैटिंग लाइनअप तैयार की वो किसी भी अन्तराष्ट्रीय क्रिकेट टीम के लिए मिसाल बन गया.
करीब 15 साल के अपने कॅरियर में राहुल द्रविड़ ने कीर्तिमानों के कई अध्‍याय लिखे. क्रिकेट के इतिहास में राहुल द्रविड़ से ज्‍यादा गेंदें किसी बल्‍लेबाज ने नहीं खेलीं. इसीलिए उन्हें क्रिकेट का ‘द वाल’ कहा गया.

एक फील्डर के तौर पर सबसे ज्यादा कैच लेने का रिकॉर्ड द्रविड़ के नाम दर्ज है. उन्होंने 301 पारियों में 210 कैच लपके हैं. द्रविड़ ने 18 अलग-अलग बल्लेबाजों के साथ 75 बार शतकीय साझेदारी की है, यह एक विश्व रिकॉर्ड है.

कोलकाता का वो ऐतिहासिक टेस्ट
साल 2001, कोलकाता का इडन गार्डन मैदान, बनाम आस्ट्रेलिया, द्रविड़ ने लक्ष्मण के साथ मिलकर वो किया जो खेल इतिहास के स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गया. फालोआन के लिए खेल रहे भारत की स्थिति नाजुक थी. द्रविड़ और लक्ष्मण की पांचवे विकेट के लिए 376 की साझेदारी ने मैच का रुख ही पलट दिया और आस्ट्रेलिया को हार का सामना करना पड़ा. हार के बाद भी आस्ट्रेलिया को यकीन नहीं हो रहा था कि वो हार चुके हैं.

जब सचिन हुए थे नाराज
साल 2004, पाकिस्तान का मुल्तान, भारत के कप्तान राहुल द्रविड़ थे, सहवाग 309 मारकर मुल्तान के सुलतान बन चुके थे. भारत का स्कोर पांच विकेट पर 675 रन था. अचानक कप्तान द्रविड़ ड्रेसिंग रूम से इशारा करते हैं पारी घोषित करने का. ये निर्णय कोई ऐसा निर्णय नहीं था जिसमें कोई अचरज भारी बात हो, बात ये थी कि उस समय सचिन तेंदुलकर एक छोर पर 194 रन बनाकर खेल रहे थे. उस समय तो सचिन तेंदुलकर चुपचाप सिर झुकाए ड्रेसिंग रूम की तरफ चल देते हैं, लेकिन ड्रेसिंग रूम में बैठे सचिन के पास जब राहुल द्रविड़ जाते हैं तो सचिन उनसे कहते हैं कि मुझे अकेला छोड़ दो. बाद में द्रविड़ के इस फैसले की खूब आलोचना हुई थी. क्योंकि महज छह रनों से सचिन दोहरे शतक से चूक गए थे.


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