क्या बीएसपी में मायावती की जगह ले पाएंगे आकाश आनंद?


क्या बीएसपी में मायावती की जगह ले पाएंगे आकाश आनंद?

दिखने में स्मार्ट, जींस और शर्ट पहनने वाला और विदेश से पढ़ा हुआ लड़का। भारत में इतने गुण एक नेता के पॉप्युलर होने के लिए काफी हैं लेकिन नए-नवेले आकाश आनंद के पास इसके अलावा सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है कि वह बीएसपी चीफ मायावती के भतीजे हैं। आकाश आनंद का प्लेसमेंट राजनीति में हो चुका है और सीधे मायावती की कुर्सी तक पहुंच गए हैं। आगरा में हुई गठबंधन की रैली से पहले से जब चुनाव आयोग ने मायावती के प्रचार करने पर रोक लगाई तो आकाश आनंद पहली बार मंच पर बोलने खड़े हुए।

आकाश के विदेश से पढ़े होने और युवा होने के चलते उनसे उम्मीद थी कि कुछ नया करेंगे। इस उम्मीद से बिलकुल अलग आकाश आनंद एक पन्ने से कुछ पढ़ते नजर आए। हो सकता है कि पहली बार इतनी बड़ी रैली में बोलने की नर्वसनेस रही हो लेकिन कम से कम बोलने के स्तर पर तो वह बुरी तरह फेल हुए। 2019 में आप युवा नेता के तौर पर इतनी बड़ी रैली में बोलने आएं और तीन मिनट के लिए भी पन्ना देखकर बोलना पड़े तो इतना समझ आता है कि आपकी ग्रूमिंग सही से नहीं हुई है।

पहला भाषण खराब लेकिन मौके अभी और हैं!
बात सिर्फ पन्ने से पढ़ने की ही नहीं भाषण शैली की भी है। आकाश आनंद अजीबो-गरीब अंदाज में अपना भाषण पढ़ते और बीच-बीच में जोश लाने की कोशिश करते दिखे लेकिन वह कहीं से भी सहज नहीं था। हालांकि, अभी उनके पास मौका है और उनको टीम से ड्रॉप करने वाला कोई कैप्टन है नहीं तो उनके पास इसे सुधारने का पूरा मौका है।

अगर मायावती की बात करें तो वह भी हमेशा लिखा हुआ भाषण ही पढ़ती रही हैं और उनकी भाषणशैली भी बिलकुल प्रभावी नहीं है लेकिन उनका काडर मजबूत रहा है। हालांकि, नरेंद्र मोदी, अखिलेश यादव, योगी आदित्यनाथ जैसे नेताओं की तगड़ी भाषणशैली के बीच आपका पन्ने से पढ़कर भी ठीक से ना पढ़ पाना पब्लिक अपीयरेंस के मामले में आपको पीछे छोड़ सकता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण राहुल गांधी हैं।

चंद्रशेखर आजाद देंगे आकाश आनंद को चुनौती
बीएसपी के काडर को देखें तो समझ आता है कि आकाश आनंद को स्वीकार करने में काडर को कोई खास समस्या नहीं होगी। ऐसे में अगर आकाश मायावती से सीखकर काडर को संभालना जान गए और सधे हुए नेता के रूप में सामने आए तो बीएसपी एकबार फिर से वापसी कर सकती है। लेकिन आकाश आनंद का मुकाबला भविष्य में भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद से होना है, इसके लिए उन्हें तैयारी में बहुत मेहनत करनी होगी।


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