तीन राज्य जीतकर जोश में आई कांग्रेस UP में अकेले उतरेगी?


यूपी में महागठबंधन की उम्मीद लगाए बैठी कांग्रेस को सोमवार को एसपी और बीएसपी ने एक बड़ा और सांकेतिक झटका दिया। हो सकता है कि यह दबाव बनाने की रणनीति ही हो लेकिन तीन राज्यों में हुए शपथ ग्रहण में अखिलेश यादव और मायावती का न जाना एक बड़ा संदेश है। संदेश साफ है कि यूपी में सीट बंटवारे को लेकर फंसा पेच और कस गया है और गुत्थी फिलहाल तो सुलझती नहीं ही दिख रही है।

 

जानकारों का मानना है कि तीन राज्यों में अच्छा प्रदर्शन कर चुकी कांग्रेस अब यूपी में भी अपना दावा और मजबूत मान रही है। जबकि एसपी और बीएसपी कांग्रेस को यूपी में महत्व देना नहीं चाहते हैं। कांग्रेस की कोशिश है कि वह 80 में से कम से कम 20 सीटों पर चुनाव लडे़ जबकि एसपी और बीएसपी उसे अधिकतम 10 या फिर सिर्फ रायबरेली और अमेठी ही देना चाहते हैं।

 

अखिलेश यादव तो इसमें थोड़ी रियायत दे भी सकते हैं लेकिन मायावती कतई झुकने को तैयार नहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक, मायावती 35 से कम सीट पर मानने को तैयार ही नहीं हैं। ऐसे में संभावना है कि कांग्रेस इस गठबंधन से अलग हो जाए या फिर वह कुछ अन्य क्षेत्रीय पार्टियों से हाथ मिला ले। ऐसे में थोड़ा बहुत फायदा बीजेपी को हो सकता है क्योंकि इस स्थिति में गठबंधन को मिलने वाला एकमुश्त मुस्लिम वोट बंटेगा और बीजेपी हिंदुओं का ध्रुवीकरण करने में सफलता पा सकेगी।

 

कहा यह भी जा रहा है कि अगर कांग्रेस अलग हुई तो बीएसपी सबसे ज्यादा सीटों पर लड़ेगी और अखिलेश यादव अपने कोटे से आरएलडी, पीस पार्टी, निषाद पार्टी और संभवत: ओम प्रकाश राजभर की एसबीएसपी को भी समायोजित करेंगे। फिलहाल अखिलेश यादव, मायावती या राहुल गांधी की ओर से इस बारे में कोई बयान नहीं है। ऐसे में हो सकता है कि तीनों नेता अगर मिलें तो समीकरण बदल भी सकते हैं।


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