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लड़कर, पिटकर यूपी में मुख्य विपक्षी पार्टी बन जाएगी कांग्रेस?


यूपी की राजनीति में कांग्रेस मुख्य विपक्ष बनती दिखने लगी है। अखिलेश यादव और मायावती के गढ़ रहे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उनकी गैरमौजूदगी का वैक्यूम प्रियंका गांधी और कांग्रेस की मौजूदगी भर रही है। यूपी में अब तक संयमित राजनीति करने वाली कांग्रेस अग्रेसिव दिखने लगी है। इसमें राहुल या सोनिया का नहीं, सिर्फ और सिर्फ प्रियंका गांधी का असर है। खास बात ये कि कांग्रेस उसी तरह दलित मुद्दे पर ऐक्टिव है, जैसे कभी बिहार के बेल्छी में इंदिरा गांधी हाथी पर सवार होकर मारे गए दलितों के गांव पहुंची थीं। 1977 के उस रोज के बाद इंदिरा पर गरीबों का विश्वास बढ़ा तो चुनाव के समीकरण भी बदले। यूपी में कांग्रेस भी उसी राह पर है।

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जमीन पर लड़कर पार्टी को मजबूत कर रहे अजय कुमार लल्लू

 

अजय कुमार लल्लू

अजय कुमार लल्लू

कुछ वक्त पहले का वक्त याद करिए। अजय कुमार लल्लू यूपी कांग्रेस के चीफ बनाए गए थे। लोगों ने कहा, ये कौन हैं…ये तो बहुत जूनियर हैं। कांग्रेस पागल हो गई है। पर आप उस कलाकारी को नहीं समझ रहे हैं। कांग्रेस के पतन का सबसे बड़ा कारण है उसके सफेद हाथी। क्या आप इमैजिन कर सकते हैं कि सलमान खु्र्शीद, श्री प्रकाश जायसवाल, आरपीएन सिंह, पीएल पुनिया, प्रमोद तिवारी और तमाम सीनियर लीडर ऐसे पुलिस या प्रशासन के सामने लेट सकते हैं, जैसे लल्लू लेट जाया करते हैं। नेता वही है जिसे लाठी खाने, कपड़ा फट जाने या घसीट कर गिरफ्तार हो जाने की शर्म ना हो। विपक्ष में होने की सबसे बड़ी जरूरत यही है। मुलायम सिंह यादव के समय समाजवादी पार्टी का फ्लेवर यही था, जब मायावती के अफसर लखनऊ के पार्क रोड पर उसके कार्यकर्ताओं को बूटों से मारा करते थे।

राहुल गांधी अबकी कांग्रेस से परिवारवाद को खत्म करवा ही देंगे?

प्रियंका गांधी ने यूपी कांग्रेस में भरा जोश

अब क्षेत्रीय दलों की राजनीति का काल अवसान पर जाने लगा है। प्रियंका यूपी में अग्रेशन के साथ दिखाना चाहती हैं कि जहां योगी सरकार के खिलाफ असंतोष होगा, वह पहले वहां पहुंचेंगी। सोनभद्र के उम्भा से लेकर हाथरस के बूलागढ़ी तक यही दिखाया गया है। उम्भा में प्रियंका को रोका गया तो वो गेस्ट हाउस में धरने पर बैठ गईं। बिना लाइट, बिना पानी कांग्रेस के वर्कर जमीन पर सोते दिखे। प्रियंका के इस अग्रेसिव रोल को मीडिया का समर्थन भी मिला, क्योंकि यूपी कांग्रेस के लिए ये नई बात थी। अब हाथरस में भी यही है।

बड़ा संदेश दे रही है राहुल-प्रियंका की जोड़ी

एक दलित जाति की लड़की के लिए कांग्रेस का यहां सक्रिय होना, राहुल गांधी का मार्च में पुलिस से भिड़कर गिर जाना या प्रियंका का खुद ड्राइव कर हाथरस जाना…दलितों के बीच संदेश पहुंचा रहा है। विकास दुबे के केस पर ब्राह्मणों की नाराजगी, कफील खान पर कुछ मुसलमानों की और हाथरस पर दलितों की…अगर कांग्रेस इसे कैश करा ले गई तो समीकरण बदलेंगे।

कांग्रेस वाली भूल ही दोहरा रही है बीजेपी

बीजेपी वही कर रही है जो कभी कांग्रेस नरेंद्र मोदी के लिए कर रही थी। बीजेपी को ये विश्वास है कि राम मंदिर, 370 और चीन जैसे मुद्दों पर यूपी में प्रियंका कहां उनका मुकाबला कर पाएंगी। प्रियंका को छोटा समझा जा रहा है। वैसे ही जैसे सोनिया नरेंद्र मोदी को बस गुजरात का सीएम भर ही मानती थीं। पर चीटी कब हाथी के कान तक पहुंच जाए कोई नहीं जानता। कांग्रेस जिंदा दिखने लगी है। पर प्रियंका को अच्छे वक्ताओं, ब्रांडिंग और यूपी इलेक्शन के जबरदस्त प्लानर्स की जरूरत है…। उन्हें ये जवाब देना होगा कि वो राजस्थान क्यों नहीं गईं…अगर देकर जनता को संतुष्ट कर ले गईं तो समझिए कि यूपी में इस बार माहौल दूसरा होगा।


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