अच्छे काम अगर भोंपू बजाकर भी हों तो ‘काम अच्छे हैं’


मलिच्छों की कमी नहीं है देश में. कचरा फैलाने में सब मास्टर माइंड. हर कोई कहीं भी मुंह उठाकर थूक देता है. सफाई की हम बात करते हैं लेकिन हमारी आदत में ज़रा भी सफाई शुमार नहीं है.

याद कीजिए आखिरी बार आपने नमकीन/गुटखा/बीड़ी, सिगरेट या पाउआ पीकर/खाकर रैपर/बोतल डस्टबिन में फेंका है. अगर आप कचरे को सही जगह पहुंचाते हैं तो अच्छा काम कर रहे हैं…..इसका प्रचार शुरू कर दीजिए. अच्छी चीजों का प्रसार-प्रचार हो तो अच्छी बात है.

ऐसे वक्त में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, महात्मा गांधी के बाद खुद को सफाई का सबसे बड़ा महानायक मानते हैं, स्वच्छ भारत के लिए अच्छा-खासा टैक्स वसूला जा रहा है, तो सफाई कर ही लेनी चाहिए.

अच्छी बात है. इस हरकत का प्रदर्शन भी. अच्छे काम अगर पब्लिसिटी के लिए भी किए जाएं तो बेहद अच्छी बात है. इस पर अमल होना चाहिए.

सोशल मीडिया पर मोदी की सफाई का वीडियो ट्रेंड कर रहा है. कई मीम्स शेयर किए जा रहे हैं. खिंचाई हो रही है. कुछ मोदी को राष्ट्रीय अभिनेता बता रहे हैं तो किसी को लग रहा है कि पब्लिक सेक्टर को कचरा समझकर मोदी बीन रहे हैं और उसे अंबानी, अडानी जैसे उद्योगपतियों के हवाले कर रहे हैं. सही है, आलोचना अपनी जगह है, कैमरा प्रेम अपनी जगह है, लेकिन मोदी काम जो कर रहे हैं…वीडियो में वो सही है…..दिखावे के लिए ही सही अच्छे काम होते रहने चाहिए.

दरअसल नरेंद्र मोदी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के लिए ममल्लापुरम में हैं. इसी दौरान नरेंद्र मोदी ने ममल्लापुरम के एक बीच पर प्रधानमंत्री ने सफाई की. साफ-सफाई का वीडियो भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जारी किया है. इस वीडियो में पीएम मोदी कुछ प्लास्टिंग की बोतलें उठाते दिख रहे हैं.

बीच के किनारे प्लास्टिक की कुछ बोतलें पड़ी हैं, साथ ही पॉलिथिन के कुछ टुकड़े भी. प्रधानमंत्री कूड़ा बीनते हैं, पॉलिथिन की थैली में जमा करते हैं, साथ में खड़े एक सहयोगी को प्लास्टिक का कचरा सौंप देते हैं. सफाई खत्म.

विडियो के साथ मोदी ने लिखा, ‘आज सुबह ममल्लापुरम के बीच पर साफ-सफाई की. यह काम करीब आधे घंटे किया. अपनी तरफ से एकत्र किए कचरे को मैंने जयराज को दिया, जो होटल स्टाफ का हिस्सा हैं…चलिए यह पक्का करें कि हमारे सार्वजनिक स्थल साफ-सुधरे रहेंगे. यह पक्का करते हैं कि हम फिट और हेल्दी रहेंगे.’

जाहिर तौर पर वहां दर्जनों कैमरे लगे होंगे. हर एंगल से, जंचते हुए पीएम मोदी नजर आएं. आलोचना हो सकती है कि यह आदमी कैमरे का भूखा है. हर जगह चाहता है कि तस्वीरें उतारी जाएं….तारीफ हो. लेकिन इस काम की सच में तारीफ होनी चाहिए. सार्वजनिक स्थलों की सफाई होनी चाहिए…निजी स्थानों की भी.

सफाई मिशन की तरह होना चाहिए. हर दिन हर रोज. गंदी सड़कें, कचरे, प्लास्टिक की बोलतें जीते-जागते शहर को मुर्दा बना देती हैं. जिंदा लोग अपने आस पास सफाई करके रखते हैं.

कितना भी आलोचना करें, लेकिन सफाई के लिए मोदी की बात सही है. साफ-सफाई होते रहना चाहिए…..आलोचना से परे.

सार्वजनिक पदों पर बैठे लोग जब कुछ करते हैं तो उसका प्रभाव जनता पर भी पड़ता है. हो सकता है कि सफाईगीरी से प्रभावित होकर कुछ लोग इस नेक काम में जुट जाएं. सफाई करें…अपने आसपास की जगहों को साफ रखें….कचरे को डस्टबिन में ही डालें….गंदगी न फैलाएं न फैलने दें…टाइप.

अगर दारूबाज दोस्तों के साथ लोग दारू सीख जाते हैं…बीड़ी फूंकने वालों के साथ सुट्टेबाजी और गांजा पीने वालों के साथ गंजेड़ीपन….तो सफाई करने वालों के साथ रहकर…थोड़ी बहुत सफाई सीखी जा सकती है…बाकी भाई अपना-अपना रुझान.

पब्लिसिटी जरूरी है
पब्लिसिटी जरूरी है अगर आप किसी भूखे हो खाना खिलाते हैं….किसी जरूरत मंद के लिए खड़े होते हैं…कोई आंदोलन कर रहे हैं….किसी को खून देने गए हैं….किसी के लिए लड़ रहे हैं….किसी को सुधार रहे हैं…..अगर सफाई भी कर रहे हैं…
जरूरी है अच्छे कामों का प्रचार भी..प्रसार भी.
अगर आप कोई भी नेक काम कर रहे हैं..तो उसका प्रचार करें…चीख चिल्लाकर करें…पोस्टर लगवा दें. हो सकता है कि कुछ लोग आपसे प्रभावित होकर कोई नेक काम करने लगें.

बाकी नेकी कर दरिया में डाल कहावत है ही…..
बाकी आलोचना करते रहिए….हमें भी लगता है कि अमिताभ बच्चन ने भी एक्टिंग मोदी से ही सीखी होगी.


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