मेघालय हिंसा

एक एनकाउंटर, हिंसा और सुलग उठा मेघालय, समझिए अशांति की वजह

भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में एक खूबसूरत राज्य है मेघालय. दशकों तक समूचे पूर्वोत्तर में चले संघर्ष के बाद अब ज्यादातर हिस्सों में शांति कायम है. हालांकि, हाल में हुए एक एनकाउंटर ने मेघालय की शांति भंग कर दी है. उग्रवादी संगठनों से संबंध रखने वाले चेरिस्टरफील्ड थांगख्यू को एक एनकाउंटर में मार दिया गया. स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह एनकाउंटर फर्जी है. इसी वजह से स्थानीय लोग हिंसा पर उतर आए हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं.

कौन था चेरिस्टरफील्ड थांगख्यू?

चेरिस्टरफील्ड थांगख्यू एक उग्रवादी था. थांगख्यू एक प्रतिबंधित संगठन हाइविनट्रपे नेशनल लिबरेशन काउंसिल का महासचिव था. रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 में थांगख्यू ने सरेंडर कर दिया था. पुलिस का कहना है कि सरेंडर करने के बावजूद थांगख्यू ऐक्टिव था और उसने आईईडी धमाकों की साजिश रची थी.

लोकल डिब्बा के YouTube चैनल को सब्सक्राइब करें.

ताजा मामला क्या है?

13 अगस्त को पुलिस थांगख्यू के घर छापेमारी के लिए पहुंची. मामला आईईडी धमाकों की साजिश से जुड़ा था. पुलिस के मुताबिक, थांगख्यू ने छापेमारी के दौरान पुलिस की टीम पर हमला कर दिया. इसी हमले के जवाब में पुलिस ने फायरिंग की जिसमें थांगख्यू मारा गया. 15 अगस्त को थांगख्यू के अंतिम संस्कार के दौरान सैकड़ों लोग काले झंडे लेकर शवयात्रा में शामिल हुए.

इसके बाद स्थिति बिगड़ती गई. कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ की. कुछ अज्ञात लोगों ने मावकिनरोह पुलिस चौकी के पास पुलिस की एक गाड़ी में आग लगा दी. आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में कर्फ्यू लगा दिया गया. साथ ही, चार जिलों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं.

मेघालय के गृहमंत्री ने दिया इस्तीफा

राज्य में कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी गृहमंत्री की होती है, लेकिन इस मामले के बाद मेघालय के गृहमंत्री लहकमन रिम्बुई ने इस्तीफा दे दिया है. रिम्बुई ने कहा कि इस मामले में न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए, जिससे एनकाउंटर की सच्चाई सामने आ सके. रिम्बुई का कहना है कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए इसलिए वह इस्तीफा दे रहे हैं.

मेघालय की स्थिति क्या है?

मेघालय में विधानसभा की 60 सीटें हैं. नैशनल पीपल्स पार्टी के मुखिया कोनराड संगमा राज्य के मुख्यमंत्री हैं. उनकी पार्टी को विधानसभा चुनाव में कुल 20 सीटें मिली थीं. एनपीपी के अलावा यूडीपी, पीडीएफ और बीजेपी जैसी पार्टियां सत्ता पक्ष में शामिल हैं. वहीं, सबसे ज्यादा 21 सीटें जीतने वाली कांग्रेस पार्टी विपक्ष में है. हालांकि, अब कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी नहीं रह गई है, क्योंकि उसके कुछ विधायक इस्तीफा दे चुके हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *