kumar vishwas

कवि कुमार विश्वास ने बता दिया है कि पार्टी प्रवक्ता झूठे होते हैं


कवि कुमार विश्वास अपने वाणी कौशल और तर्कशीलता के कारण काफी पसंद किए जाते हैं और अकसर टीवी बहसों के दौरान विरोधियों के छक्के छुड़ाते दिखते ‘थे’। यहां थे का प्रयोग इसलिए किया है कि अब कुमार विश्वास आम आदमी पार्टी की ओर से बहस या किसी अन्य कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेते, या यूं कहें कि अब विश्वास और ‘आप’ की राहें हमेशा के लिए ही अलग हो गई हैं।

हाल ही में केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली द्वारा दायर किए गए मानहानि केस में अरविंद केजरीवाल ने लिखित माफी मांगी थी लेकिन कुमार विश्वास ने माफी मांगने से इनकार किया था। 3 मई को दिल्ली हाई कोर्ट में कुमार विश्वास ने कहा कि उन्होंने जो बयान दिया, वह पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल से मिली सूचनाओं के आधार पर दिया था। कुमार ने कोर्ट से समय मांगा है कि वह यह सोच सकें कि क्या बयान दें, जिससे यह मामला खत्म हो सके। मामले में अगली सुनवाई 28 मई को तय की गई है।

कुमार ने यह भी कहा कि माफी मांगने से पहले वह इस बारे में सुनिश्चित होना चाहते हैं कि क्या उस समय केजरीवाल द्वारा कही गई बातें झूठी थीं? विश्वास ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘हर पार्टी का एक मुखिया होता है और उसी के कहे अनुसार कार्यकर्ता या प्रवक्ता काम करते हैं। हमारी पार्टी में भी हमने एक शीर्ष नेता चुना, उसने कुछ पेपर दिखाए और कहा कि सर जी ये भ्रष्टाचार हुआ है बोल दीजिए, मैं प्रवक्ता था मैंने बोल दिया।’

दिक्कत तो यहां है

बात यहीं फंसती है। क्या हर पार्टी में जो प्रवक्ता टीवी पर एकदम ‘सत्य’ बोलने की मुद्रा में नजर आते हैं वह एकदम सच ही बोलते हैं? कितने दावे के साथ ये प्रवक्ता आरोप लगाते हैं और बाद में कुमार विश्वास कहते हैं कि हमारा तो नेता ही खराब निकला। उन लोगों या कार्यकर्ताओं का क्या जो केजरीवाल या कुमार विश्वास के पीछे हरदम खड़ रहे? क्या उस जनता से धोखा नहीं हुआ, जिसने अरुण जेटली को केजरीवाल के कहने पर बेईमान माना?

सोचिए, कितनी बड़ी समस्या है यह कि पार्टी के प्रवक्ता जो कुछ भी बोलते हैं वह सबकुछ अपने नेता के कहने पर बोलते हैं। वह यह भी नहीं देखते कि सच बोल रहे हैं या झूठ? माफी मांगना बड़प्पन या फिर कहें कि मजबूरी हो सकती है कि लेकिन इस तरह की माफी को जनता के साथ छल भी माना जाना चाहिए। जनता को भी यह समझ लेना चाहिए कि टीवी पर दिखने वाले ये प्रवक्ता सच्चे नहीं बल्कि अजेंडा चलाने वाले रोबोट की तरह हैं, इनमें एक चिप लगाई जाती है और ये वही प्ले कर देते हैं। बाद में अगर चिप निकल गई तो थोड़ा सा इंसानी गुण दिखाकर माफी मांग लेंगे बस।


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