क्लिकबेट वाला मीडिया और मौत में दफन होते मुद्दे


एक गाना याद आ रहा है ‘भूल गया मैं सब कुछ, अब याद नहीं है अब कुछ’ यही हाल मीडिया का है। अब मीडिया भूल जाएगा कि कोई नीरव मोदी भी था और कोठारी तो अब कोठरी में बंद हो जाएंगे। जैसे मौत कोई ना कोई बहाना लेकर आती है इंसान के जीवन को खत्म करने का, कुछ वैसा ही हाल खबरों का है, बस यहां खबरों को खत्म करने का बहाना मौत है।

श्रीदेवी नहीं रहीं इस बात का मुझे बहुत दुख और मुझे इस बात का ज्यादा दुख है कि जो मुद्दे चल रहे थे वे भी दफन हो गए। उनकी मौत के साथ ही मीडिया ने उन खबरों पर मिट्टी डाल दी है। अब श्रीदेवी मरी हैं भाई, इतना तो बनता है कि मेहुल भाई को भुलाया जाए और याद किया जाए कि अर्जुन कपूर क्यों गुस्सा थे श्रीदेवी से। अब आपको अर्जुन कपूर याद रहने चाहिए। विपुल अम्बानी भी कोई पकड़े गए थे यह बात तो जहन से भी निकाल दीजिए। नीरव मोदी भी कोई था क्या? इसको भूल जाइए और याद करिए की श्रीदेवी को कैसे बचाया जा सकता था। वैसे बचाया तो पीएनबी को भी जा सकता था लेकिन कोई बात नहीं मुझे दुख है कि हम दोनों को ही नहीं बचा पाए। अच्छा चलिए सीरियस ना हो जाइए आप, अब मीडिया दिखा रहा है श्रीदेवी का सब से रिश्ता इसलिए यही याद रखना है और यह भूल जाना है कि नीरव मोदी का तो रिश्ता नोटबंदी से भी रहा, मीडिया भूल जाएगा सारे घोटाले और आप से भी उम्मीद है कि आप भी भूल जाएंगे।

अब उन विवादों को याद रखना है जो श्रीदेवी की मौत से जुड़े हैं। चंदन चोरी तो कोई मुद्दा है ही नहीं, इनफैक्ट ऐसा कुछ हुआ ही नहीं है और हुआ होता तो मीडिया जरूर दिखाता कि आखिर वीरप्पन के बाद कोई चंदन चोर आया है देश में। बस फर्क इतना है कि उस वीरप्पन को योग नहीं आता था। चलिये यह भी छोड़िए और देखिए अमिताभ ने कोई ट्वीट करा कि नहीं श्रीदेवी की मौत पर। अब याद रखिए की श्रीदेवी की मौत कैसे हुई और क्या है वज़ह? आपको यह बिल्कुल याद नहीं करना कि जो बच्चे बिहार में मारे गए थे, वे कैसे और किसकी गाड़ी से कुचल दिए गए? अरे! मैं तो भूल गया था, यह तो कोई मुद्दा ही नहीं यह तो दफन हो गया मौत के बाद…

श्रीदेवी की मौत कई खबरों के खत्म हो जाने का जश्न भी है।


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