हिमाचल प्रदेश: समझें, इस पहाड़ी राज्य का सियासी गणित


हिमाचल प्रदेश देश के सबसे खूबसूरत प्रदेशों में गिना जाता है। अपर मिडल क्लास के लोग हनीमून से लेकर तमाम टूर के लिए हिमाचल को ही चुनते हैं। प्रदेश में लोकसभा की कुल चार सीटें हैं और 2014 में बीजेपी को सभी सीटों पर जीत मिली थी। प्रदेश की मुख्य पार्टियों की बात करें तो लड़ाई हमेशा बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही रही है।

2009 के लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने चार में से तीन सीटें जीतीं थीं और कांग्रेस के हिस्से में सिर्फ एक ही सीट आई थी। 2009 में भी बीजेपी और कांग्रेस के बीच मामला 3-1 का ही था। हालांकि, 2004 के लोकसभा चुनाव में मामला कांग्रेस के पक्ष में था। तब कांग्रेस को तीन सीटें मिली थीं और बीजेपी को सिर्फ है। इसका मतलब है कि दोनों ही पार्टियों में हमेशा कांटे की टक्कर रही है।

फिलहाल प्रदेश में बीजेपी की सरकार है। राज्य की 68 में बीजेपी ने 2017 के चुनाव में 44 पर जीत हासिल की और मजबूती के साथ सत्ता में वापसी की। वीरभद्र सिंह की उम्र ढलने और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरने के बाद कांग्रेस राज्य में कमजोर हो गई है। हालिया समय में भी कांग्रेस ने जमीन पर वह जुझारूपन नहीं दिखाया है, जो उसे वापसी के लिए दिखाना चाहिए।

तमाम सर्वे में भी दिखाया जा रहा है कि दिग्गज नेताओं की फौज से सजी बीजेपी राज्य की चारों लोकसभा सीटों पर जीत हासिल कर सकती है। ऐसे में कांग्रेस अपनी वापसी के लिए हिमाचल में क्या प्रयास करती है, यह देखने वाली बात होगी।

लोकल डिब्बा का अनुमान
बीजेपी- 3-4
कांग्रेस- 0-1


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