कविता- तुम जानती हो चुराए हुए चुम्बनों का स्वाद?


तुम्हारे कुछ चुंबन बचे हैं मेरे होठों पर

कुछ मेरे भी बचे हों शायद तुम्हारे पास

ये हमारे पहले चुंबन नहीं थे

ये चुराये हुये थे

तुम्हारे पहले प्रेमी और मेरी पहली प्रेमिका से

शायद

उन दोनों को चूमना नहीं आता था

चुराये हुये चुंबनों का स्वाद

बहुत तीखा होता है

इनमें मिली होती है

थोड़ी सी हवस

थोड़ा सा प्यार

जो नमकीन होता है

लेकिन

कोई स्वाद नहीं देते।

हमारे हर चुंबन के बाद

बच जाती थी

तुम्हारी गुलाबी लिपस्टिक

मेरे होंठों पर

तुम्हारे होंठों पर मेरी सिग्रेट का कसैला स्वाद।

तुम्हें फिर चूमना चाहता हूं,

खुले आसमान के नीचे

जमीन में पैर रख,

ठण्डी हवा के बीच

जहां सब देख सकें

और हां!

अबकी तुम्हारी लिपस्टिक

और

मेरी सिग्रेट का स्वाद चूमने के बाद हमारे होंठों पर नहीं बचेगा।


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