आजकल सूत्र बड़ी चर्चा में हैं, लीजिए सूत्र का ही इंटरव्यू आ गया है


आज हम जिसकी बात करने जा रहे हैं। सब लोग उनकी बात हवाले से करते हैं। कोई उनका हवाला कहीं देता है तो कोई कहीं। मीडिया में इनका अलग ही बोलबाला है। मीडिया में कहा जाता है कि जिसका कोई नहीं होता उनके यही होते हैं। अब आप लोग नाम जानने के लिए बेसब्र हो रहे होंगे! वैसे मैं यह भी बता दे रहा हूं कि इनका नाम कोई नया नहीं है, आपके लिए। जी इनका नाम है ‘सूत्र जी’।

 

इन्हें मीडिया के इकलौते लड़के के रूप में भी जाना जाता है। ये सर मीडिया के सबसे प्यारे और दुलारे भी हैं क्योंकि सबसे मुश्किल वक़्त में यही उनका साथ देते हैं। कहा जाता है कि जब मीडिया के पास कोई सोर्स नहीं होता तो ये अपने हवाले से बहुत कुछ दे देते हैं, जिससे मीडिया का काम चल जाता है। तो चलिए अब इनसे कुछ सवाल-जवाब करते हैं।

फलाने– नमस्कार सर, आपका स्वागत है लोकल डिब्बा पर।
सूत्र– नमस्कार फलाने जी।

 

फलाने– आपको नहीं लगता मीडिया आपका गलत इस्तेमाल करता है?
सूत्र– अब वो बेचारे क्या ही करें, उनके पास मेरे अलावा तो कुछ है ही नहीं, अगर मैं भी उनके विरोध में आ गया तो दिक्कत हो जाएगी।

 

फलाने– सर लेकिन वो सब चीज आपके हवाले से क्यों करते हैं?
सूत्र– देखिए मेरे हवाले से इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि वह बात कहीं बोली ही नहीं गई है लेकिन उनका मन होता है, बोलने का वो बात इसलिए वो ऐसा करते हैं।

 

फलाने– सूत्र जी आपको खबर कौन देता है?
सूत्र– देखिए पहली बात तो मुझे खबर देने की हिम्मत किसी में नहीं है। हां ये जरूर है कि कभी-कभी मैं अपनी बहन रिपोर्ट से पीछे रह जाता हूं खबर देने में।

 

फलाने– ये बताइए सर कि आपके हवाले से कोई किसी को मार कैसे सकता है?
सूत्र– अब कोई हमले से न मरे तो मेरे हवाले से ही मरना पड़ता है। एक बात बता देता हूं कि मेरे हवाले से मरने का एक फायदा है कि आप दोबारा उसी इंसान को मेरे हवाले से मार सकते हैं।

 

फलाने– अपने परिवार के बारे में कुछ बताएं आप।
सूत्र– वैसे तो हम कई लोग हैं। जैसे कि बड़े भइया विशेष सूत्र, घर वाले भइया आंतरिक सूत्र, एक नटखट भाई खुफिया सूत्र और हमारे पापा आधिकारिक सूत्र। ये कुछ खास लोगों का बता दिया मैंने आपको, अगर सबका बताने लगा तो दिन गुजर जाएगा।

 

फलाने– लोगों का दावा है आज तक उन्होंने आपको देखा नहीं तो मानें कैसे?
सूत्र- फलाने जी देखा तो आपने भगवान को भी नहीं है। मानते हैं न उन्हें! और उन पर विश्वास भी करते हैं आप। तो देखने की बात तो छोड़ दीजिए, आप बस मुझ पर विश्वास करना शुरू करिए।

 

फलाने– आप एक तरह के फेक न्यूज़ हैं क्या?
सूत्र- नहीं बिल्कुल भी नहीं और आपकी ये बात बोलने की हिम्मत कैसे हुई मुझे। मैं बस आपको खुशी देता हूं और आपकी ये फेक न्यूज़ नफरत फैलती है और एक बात फेक न्यूज़ के खिलाफ फैक्ट चेक हो सकता है पर मेरे खिलाफ कभी देखे हैं कभी कोई फैक्ट चेक?

 

बहुत अच्छा लगा आपसे बात करके आपने समझा दिया कि कैसे आप मीडिया के दुलारे हैं। और आपकी बात से एक बात मुझे और समझ आई सूत्र जी कि मीडिया एक बार को अपने आप पर भरोसा करना छोड़ सकता है लेकिन आप पर नहीं। मैं आपके हवाले से जनता को बोलना चाहता हूं कि ये जो इंटरव्यू लिया गया वो पूरा का पूरा सूत्रों के हवाले से है।


यह एक व्यंग्यात्मक और काल्पनिक इंटरव्यू है।


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