जम्मू-कश्मीर: समझिए, क्या है लोकसभा चुनाव का गणित


अंतरराष्ट्रीय दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण और अकसर चर्चा में रहने वाले जम्मू-कश्मीर में लोकसभा की कुल 6 सीटें हैं। राज्य में विधानसभा की कुल 87 सीटें हैं। राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों की बात करें सबसे आगे नैशनल कॉन्फ्रेंस, पीपल्स डेमोक्रैटिक पार्टी (पीडीपी) और कांग्रेस हैं। हालांकि, 2014 में पहली बार लोकसभा की छह में से तीन सीटें जीतने वाली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने राज्य में मजबूती से पैर पसारा है।

बीजेपी ने 2014 के आखिरी में हुए राज्य के विधानसभा चुनावों के बाद त्रिशंकु की स्थिति में पीडीपी से हाथ मिला लिया और मुफ्ती मोहम्मद सईद बीजेपी के समर्थन से 1 मार्च 2015 को सीएम बने। उनकी मौत के बाद लगभग तीन महीनों तक कुर्सी खाली रही और फिर उनकी बेटी महबूबा मुफ्ती अप्रैल 2016 में सीएम बनीं। हालांकि, बीजेपी-पीडीपी की यह दोस्ती बहुत दिन नहीं चली और बीजेपी ने समर्थन वापस ले लिया।

 

तब से अब तक पहले राज्यपाल शासन रहा और फिर राष्ट्रपति शासन लागू हो गया। उम्मीद है कि लोकसभा चुनाव के बाद ही जम्मू-कश्मीर में विधानसभा के भी चुनाव कराए जा सकते हैं। खैर, अगर प्रदेश की राजनीति की बात करें तो निचले स्तर पर कई अन्य पार्टियों का भी अस्तित्व है लेकिन लोकसभा स्तर पर यही चार पार्टियां ही असरदार रही हैं।

इसमें से सबसे ज्यादा बार मजबूत प्रतिनिधित्व करने का रेकॉर्ड नैशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के नाम रहा है। 2014 में थोड़ी फिजा बदली दिखाई दी थी और जम्मू की दो सीटें और लद्दाख की एख सीट बीजेपी तो कश्मीर की तीनों सीटें पीडीपी को मिल गई थीं। खुद नैशनल कॉन्फ्रेंस के मुखिया फारूक अब्दुल्ला श्रीनगर सीट से लोकसभा चुनाव हार गए थे। हालांकि, बाद में पीडीपी ने तारिक हमीद कर्रा ने पार्टी और पद से इस्तीफा देकर कांग्रेस का हाथ थाम लिया। उपचुनाव में फारूक अब्दुल्ला ने वापसी कर ली।

 

2019 के लिए लोकल डिब्बा का अनुमान
2019 के लिए लोकल डिब्बा का अनुमान है कि छह में बीजेपी को एक या दो सीटें ही मिलेंगी। वहीं फारूक अब्दुल्ला की नैशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस अगर साथ आते हैं तो उनकी स्थिति मजबूत हो सकती है। पीडीपी का हाल इस चुनाव में सबसे बुरा हो सकता है।
सीटों का अनुमान
पीडीपी-0-1
कांग्रेस-1-2
बीजेपी-1-2
नैशनल कॉन्फ्रेंस-2-3


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