नव वर्ष कुछ यूं क्यों ना मंगलमय हो?


नव वर्ष की अनन्त शुभकामनाएं एवं बधाई। सभी बड़ों को प्रणाम और छोटों को ढेर सारा प्यार। आप सभी को एक-एक महीना, एक एक सप्ताह, एक-एक दिन, एक-एक घण्टा औऱ एक-एक सेकेंड मुबारक हो। उठते-बैठते, सोते-जागते खाते-पीते जो भी आपके साथ हो वह सब कुछ आपको मुबारक हो।

हाँ, तो आपको बहुत मुबारकबाद दे दी है। बहुत मिठाई खिला दी है आपको। इजाज़त चाहूँगा थोड़ा सा कड़वा खिलाने के लिये, चिन्ता मत करिये ज्यादा कड़वा नहीं खिलाऊँगा, अब अनुमति तो देंगे नहीं आप, क्योंकि आपको कड़वा पसन्द नहीं है। बस असली समस्या तो यहीं से है मीठा खाते रहोगे, चाहे मधुमेह क्यों न हो जाये पर कड़वा नहीं खाना।

और खाओगे भी क्यूँ, क्या आवश्यकता है खाने की क्योंकि आपको सिर्फ अपना स्वार्थ दिखता है, चाहे वह मीठा समाज के लिए ज़हर क्यूँ न हो। कड़वा खाना सीख लो इस नव वर्ष में शायद जो कड़वी चीज़ आपने ग्रहण कर ली हो, वह समाज के लिए मीठी हो अर्थात लाभदायक हो।

एक सूक्ति हमने बहुत पढ़ी है-

तुम सुधरोगे जग सुधरेगा, तुम बदलोगे जग बदलेगा।

यह सूक्ति मेरे प्राथमिक विद्यालय के सभागार के प्रवेश द्वार पर लिखी रहती थी। रोज सुबह जब हम सब प्रार्थना के लिये जाते तो यह पढ़ते और उस समय यह सूक्ति मेरी समझ में नहीं आती थी कि इसका क्या अर्थ है, क्योंकि मैं जग का अर्थ नहीं जानता था और मैंने कभी अर्थ जानने का प्रयास भी नही किया कि मैं अपने अध्यापक से जग का अर्थ पूछूं, मुझे डर था शायद वह मुझे डाँट दें और मैंने कभी नहीं पूछा यह मेरे लिए मीठा था। चलो इसको छोड़ो मुद्दे पर आते हैं सूक्ति क्यूँ लिखी है मैंने यह यहाँ पर पढ़िये-

अपने चरित्र में बदलाव, अपने व्यवहार में बदलाव करने के लिए, सोचने के तरीके को बदलने के लिए और यह सब कैसे किया जाए उसके लिए लिखी है।

मनुष्य जाति के इतिहास में ऐसा कोई काल नही हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो। तभी तो आज तक कितने ही सुधारक हो गए हैं पर सुधारों का अंत कब हुआ? भारत के इतिहास में बुद्धदेव, महावीर स्वामी, शंकराचार्य, नानक, कबीर, राजा राममोहनराय, दयानन्द सरस्वती, महात्मा गांधी में सुधारकों की गणना समाप्त नही होती। सुधारकों का दल नगर-नगर, गांव गांव होता है। न दोषों का अंत है न सुधारों का।

आज न कोई दोषी है न कोई सुधारक सब खुद में ही दोषी हैं और खुद में सुधारक, 2017 में भी यही था और 2018 में भी यही होगा।

आज 1 जनवरी से लेकर दिसम्बर के आखिरी तक शायद आप वही करेंगे जो आपने गत वर्ष किया और फिर मुबारकबाद देंगे अगले वर्ष की, संदेशों में क्षमा मांगेंगे। बहुत चीज़ें सुधारने की आवश्यकता नहीं है, केवल चरित्र सही कीजिए, सब शुभ ही शुभ होगा। लोगों की शुभकामनाएं फलीभूत हो जायेंगी।

हम उस कार्य के लिए संकल्पबद्ध हों इस नववर्ष में जो हमने कभी न किया हो और वह कार्य कल्याणकारी हो। अपने स्वयं के लिए नैतिक मूल्यों की स्थापना करेंगे। हम सब जो कर्त्तव्यविमूढ़ बने बैठे हैं उस विमूढ़ता को दूर करेंगे।

अंत में पुनः आपको कैलेंडर वर्ष 2018 की अनन्त शुभकामनाएं।


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