कहानी: जीते कोई भी हारी फिर से नारी है


मेरा गाँव बिहार के एक छोटे से कस्बे में पड़ता है। मेरे घर से कुछ दूर पर एक छोटा सा परिवार रहता था, हर तरह से खुश और हर तरह से सम्पन्न परिवार था। यूँ कह लें तो किसी चीज़ की कमी नहीं थी। बस दुख था उन्हें तो यही था कि कोई बेटा नहीं था उनका। बस एक बेटी थी जिसका मान ऐसे होता था जैसे कोई राजकुमारी। उस परिवार में एक और बेटी थी पर वह उनकी बेटी नहीं किसी माँ-बाप की गरीबी, मजबूरी की वजह से वहाँ लाई गई थी, दोनों लड़कियाँ हमउम्र थीं। दोनो साथ-साथ बड़ी हो रही थीं, जो राजकुमारी थी, वह शहर के सबसे बड़े स्कूल में पढ़ी उसके बाद पटना गयी आगे की पढ़ाई करने और जो उस घर में एक नौकर के रूप में आई हुई थी, उसकी पूरी जिंदगी उस चारदीवारी में सिमटकर रह गयी। वह ना तो शिक्षित हुई, ना उसका मानसिक विकास हुआ। कुछ भी नहीं! हां, यह जरूर हुआ कि काम समय पर ना होने की वजह से गाली और पिटाई उसकी आदत हो गई थी। क्या कीजिएगा हमारा समाज है यह तो!
आइए आगे क्या होता है, यह सुनिए…
जो राजकुमारी थी वह ग्रेजुएट हुई पटना यूनिवर्सिटी से, शादी की बाते होने लगी, पटना के ही एक पढ़े लिखे घर का इकलौता बेटा वो भी इंजीनियर। हमारे यहाँ इंजीनियर का रेट एक बोलेरो गाड़ी और शायद 8 लाख रुपए चल रहा है। आपके यहाँ क्या चल रहा है यह तो आप ही बताइएगा।
खैर, मुद्दे पर आते हैं, तो उनकी शादी वहां बड़े धूम- धाम से हुई पूरा खर्चा हुआ। लाखों रुपए लगे उनकी शादी हो गयी और वह बिहार की राजधानी पटना की हो गयीं और जो हमारी दूसरी बेटी थी जिसे उस घर ने एक समान के अलावा कुछ नहीं समझा वह भी वहाँ से अपने घर चली गई और उसकी भी शादी एक साधारण परिवार में एक मजदूर से हो गई। मजदूर का रेट हमारे यहाँ नही है, आपके यहाँ भी नहीं होगा क्योंकि वह किसी रेट में नहीं आते। चलिए आगे यह होता है कि मैं 1 साल बाद घर जाता हूँ, देखता हूँ कि उनके घर पर एक बड़ा सा ताला लटका हुआ है। मैं माँ से इस बारे में जब पूछता हूँ तो उनका जवाब सुनकर मेरा मुँह खुला का खुला रह जाता है।

जो वह राजकुमारी रहती है, उसको उसका पति और उसके घर वाले इसलिए मार देते हैं क्योंकि जितने रुपए में वह बिका था, उसमें दो लाख कम हो गए थे 6 महीने तक उनके पिताजी नहीं दे पाए क्योंकि शादी में बहुत खर्चा हो गया था। मैं यह सुनकर कुछ बोल नहीं पा रहा था। तभी माँ ने जब ये कहा कि वो मीना थी जो उसके घर में काम करती थी, उसके पति ने भी उसको मार दिया मैंने पूछा क्यों? तो माँ का जवाब था कि रोज आकर उससे झगड़ा करता था, पीकर आता था, कोई काम नहीं करता था। एक दिन जुआ खेलने के लिए उससे पैसे मांगे, उसने नहीं दिया तो उसको कुल्हाड़ी से काट दिया। अब जब माँ ने यह बात कही तो मैं समझ नहीं पा रहा था कि क्या कहूँ।

मुझे बस इतना समझ आया कि हमारा समाज जो दो वर्गों में बंटा है। एक साधारण और दूसरे को क्या कहें, खैर अंग्रेजी में उसे क्लास कहते हैं। क्लास वाला परिवार जो दिखावे पर विश्वास करता है। उसमें कोई समानता हो ना हो पर एक समानता है। औरतों को वहाँ भी एक सामान, एक खिलौने के रूप में देखते हैं, और यहाँ भी।
मुझे उस राजकुमारी और उस नौकरानी में कोई अंतर नहीं लगता, बस उस नौकरानी की गाली और मार मौत में तब्दील हो गई और राजकुमारी को सीधे मौत मिल गई।


यह कहानी आदर्श कुमार  ने लिखी है।


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