नागरिकता

नागरिकता कानून: शरणार्थियों के प्रति दया नहीं यह ख़ालिस राजनीति है


बहुमत के दम पर मोदी सरकार ने एक और मनमानी कर डाली है। नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 अब कानून बन गया है। लोकतंत्र में मजबूत सरकार का नुकसान क्या है, यह हमें देखने को मिल रहा है। इससे पहले इंदिरा गांधी को भी मजबूत सरकार मिली थी। इंदिरा और संजय गांधी ने भी जमकर ‘मजबूत सरकार’ की मजबूती दिखाई। निजी तौर पर मेरा मानना है कि नरेंद्र मोदी फैसले लेने के मामले में इंदिरा गांधी और इमेज के मामले में जवाहर लाल नेहरू बनना चाहते हैं।

अब आते हैं नागरिकता के नए कानून पर। लोकसभा और राज्यसभा में बहुमत और रायसीना हिल्स में बैठे ‘तोते’ के दम पर नागरिकता संशोधन बिल आसानी से कानून में बदल गया है। इसका मतलब है कि छह समुदायों के शरणार्थी जोकि बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से आए हैं, वे भारत की नागरिकता ले सकेंगे। विरोध हो रहा है। बेशर्मी से इग्नोर किया जा रहा है। बेशर्मी का कारण है राजनीति। दरअसल, इस कानून को लागू करने का मकसद शरणार्थियों के प्रति कोई दया या सहानुभूति नहीं बल्कि राजनीति है।

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संकीर्णता की ओर बढ़ने लगा है भारत?

अभी तक इन शरणार्थियों को अवैध नागरिक माना जाता था लेकिन अब ये भारत के नागरिक होंगे। जिस तरह से इन छह समुदायों के लोग भारत में आए, ठीक इसी तरह बांग्लादेशी मुस्लिम और रोहिंग्या भी भारत में घुसे। ऐसे में इन छह समुदायों के शरणार्थियों को छोड़कर बाकियों के साथ भेदभाव हो रहा है, यह स्पष्ट है। बेहतर होता कि सरकार या तो सभी शरणार्थियों को नागरिकता देती या भी किसी भी शरणार्थी को नागरिकता ना देती। भारत देश का चरित्र कहता है कि हम बड़े दिलवाले हैं और सबको अपनाते हैं लेकिन यहीं राजनीति हावी हो गई है।

हर हाल में बंगाल जीतना चाहती है बीजेपी

खुद को धर्म विशेष का मसीहा समझने वाली पार्टी को ना जाने क्यों डर लगता है कि रोहिंग्या या मुसलमानों को नागरिकता मिल गई तो उसका ‘मिशन बंगाल’ फेल हो जाएगा। बीजेपी का पूरा टार्गेट सिर्फ और सिर्फ बंगाल है। कहा जा रहा है कि बांग्लादेश और असम में ऐसे लाखों शरणार्थी हैं, जो एक झटके में भारत के नागरिक बनने के ‘योग्य’ हो गए हैं। जाहिर सी बात है कि बीजेपी इनको नागरिकता देने का क्रेडिट लेगी। अगर औसतन 10 हजार लोग भी कम से कम 50 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता बने तो समीकरण बदल सकते हैं। ममता बनर्जी जितना विरोध करेंगी, उतना बीजेपी उनको ऐंटी हिंदू बताती जाएगी। कुल मिलाकर बीजेपी ने जानबूझकर ऐसा पांसा फेंका है कि उसी को हर कीमत पर फायदा हो।

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हिंदू-मुस्लिम कार्ड में हर बार फंस रहा है विपक्ष?

हर मामले को हिंदू-मुस्लिम में बदल देना बीजेपी की शातिराना हरकत हो गई है। कांग्रेस समेत तमाम विपक्ष इस चाल को चाहकर भी नहीं समझ पा रहा है। ट्रिपल तलाक, कश्मीर, अयोध्या, एनआरसी और अब नागरिकता। हर मामले में बीजेपी ने आसानी से हिंदू-मुस्लिम एंगल बना दिया। हर बार जेडीयू और शिवसेना जैसी पार्टियां लिजलिजापन दिखाते हुए झुकती दिखाई दीं। यह सब यहीं रुकने वाला नहीं है। अभी कॉमन सिविल कोड और ना जाने कितने ऐसे ही मुद्दे सामने आएंगे, जिसमें बीजेपी हिंदू-मुस्लिम कार्ड खेलेगी। जाहिर है जाति और धर्म पर चलने वाली देश की राजनीति इसी सबमें उलझी रहेगी।

घुसपैठ रुकने वाली नहीं है

फिर भी इन सबके बावजूद भी शरणार्थियों का आना कभी नहीं रुकने वाला है। भारत ऐसा देश है, जहां हर कोई चला आता है। देश के हर हिस्से में आपको बांग्लादेशी नागरिक मिलेंगे जो अवैध रूप से भारत आ जाते हैं। जरूरी ये है कि ऐसे किसी भी व्यक्ति को देश में घुसने नहीं देना चाहिए, जिसके पास कोई कानूनी आधार ना हो। इसकी चिंता भारत को नहीं बांग्लादेश और पाकिस्तान को होनी चाहिए कि उनके नागरिक पलायन क्यों कर रहे हैं।


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