इरफान खान

अपने किरदार से जिंदगी की संजीदगी बयां कर गए इरफान खान


लंचबॉक्स एक फिल्म है, उस फिल्म की अभिनेत्री निम्रत कौर का कहना है कि मेरे पास शब्द नहीं है कि आज क्या बोलूं. उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में नाम कमाने के बाद भी वो अपनी जमीन से जुड़े थे, इंसान की बहुत परख थी उन्हें, जिंदगी और दुनिया पर बहुत बारीक नजर रखते थे.

लंचबॉक्स 2013 में आई एक बहुत कमाल की फिल्म थी. ऐसे तमाम फिल्म करने वाले अभिनेता इरफान खान का निधन हो गया है. उन्हें करीब दो साल पहले मार्च 2018 में न्यूरो इंडोक्राइन ट्यूमर नामक बीमारी का पता चला था. लंबे समय तक विदेश में बीमारी का इलाज कराकर इरफान खान लगभग ठीक हो गए थे. भारत लौटने के बाद उनकी एक और फिल्म ‘अंग्रेजी मीडियम’ भी आई. लेकिन हाल ही में वे फिर मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती हुए और फिर अंततः दुनिया को अलविदा कर गए.

लोकल डिब्बा को फेसबुक पर लाइक करें।

डायलॉग नहीं इरफान की आंखेें ही बोलती थीं

यह मात्र एक खबर नहीं है कि इरफान खान का निधन हो गया. इरफान का नाम भारत के उन कुछ गिने चुने अभिनेताओं में रहेगा जो सिर्फ अदाकार ही नहीं थे बल्कि अदाकारी की पूरी एक संस्था थे. थियेटर से शुरू हुआ उनका सफर बॉलीवुड से होते हुए हॉलीवुड भी पहुंच गया था. इनफर्नो में उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई तो जुरासिक वर्ल्ड में एक वैज्ञानिक के तौर पर उन्होंने अपना जादू दिखाया. स्लमडॉग मिलियनर से लेकर लाइफ ऑफ पाई में उन्होंने दमदार किरदार निभाया.

पान सिंह तोमर उनकी अदाकारी की एक और बेमिसाल फिल्म है. इस फिल्म के बाद इरफान खान घर-घर में फेमस हो गए. इरफान का फिल्मी सफर 1998 में आई फिल्म सलाम बॉम्बे से शुरू हुआ, इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. उनकी अदाकारी देखते ही बनती थी. इरफान की अदाकारी का आलम यह था कि अगर वो मुंह ना खोलें तो उनकी आंखें ही वो काम कर जाती थीं कि लोग दीवाने हो जाते थे.

हर किरदार को दमदार बनाते गए इरफान

धीरे-धीरे एक समय ऐसा आ गया जब इरफान की गिनती बॉलीवुड के सबसे जबरदस्त एक्टर्स में होने लगी. वे उस कतार के सदस्य हो गए कि अगर इरफान फिल्म में हैं तो उसे देखने लोग जरूर आएंगे. युवा से लेकर हर उम्र के लोग इरफान खान की एक्टिंग के दीवाने हो गए. वे खालिस मनोरंजन, संजीदगी एक्टिंग के जीते-जागते परिचय बन गए.

‘मेरे पास मां है’- सिनेमा जब तक रहेगा, ये शब्द गूंजते रहेंगे

पेशेवर जिंदगी के साथ-साथ इरफान की निजी जिंदगी भी बड़ी ही दिलचस्प रही. क्रिकेटर बनने का उनका शौक पूरा नहीं हुआ तो वे नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा पहुंच गए. एनएसडी के दौरान ही उनके पिता की मौत हुई तो उस समय उनकी एक क्लासमेट ने उनका साथ दिया, नाम था सुतापा सिकंदर, यही सुतापा आगे चलकर इरफान की जीवन साथी भी बनीं.

इरफान ने कितनी फिल्मों में काम किया इसकी लिस्ट बहुत लंबी है लेकिन लीक से हटकर उनका काम करने का तरीका उन्हें एक महान अभिनेताओं में शुमार करता है. कर किरदार को ऐसे करना जैसे वो जीवन जीने का कोई संदेश दे रहे हों. पिछले सालों में उन्होंने जीवन के कठिन दौर में प्रवेश किया. कैसर की बीमारी के बाद वे विदेश इलाज कराने चले गए थे. अभी कुछ समय पहले ही उनकी मां का निधन हुआ. लॉकडाउन में घर से दूर होने के कारण इरफान ने वीडियो कॉन्फ्रेस‍िंग से मां के अंतिम दर्शन किए थे.


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *